Tuesday, 30 May 2017
Wednesday, 26 April 2017
Tuesday, 11 April 2017
जन्नत...
जन्नत का तलबगार
नहीं मैं
इक अदद
ज़िंदगी, बस नसीब
हो
थोड़ी सी मुहब्बत,
कुछ सुकून
इक हमदर्द, जो दिल के करीब
हो...
बारिश में भीगते
बूढ़े सनोबर
बादलों से ढके
ऊँचे पहाड़
वादियों की पेचीदा सड़कें
हर रास्ता
जहाँ बे-.तरतीब
हो...
छोटा ही
सही, महफूज़ घरोंदा
आँगन में
गुलशन-ए-बहार
हो
परिंदों की महफ़िल सजे जब-जब
कोयल का
रुतबा हसीब हो...
पास ही
इक घना सा
जंगल
हुकूमत हिरण की
चलती हो
शेर और
चीते अमन पसंद
बाज़ फ़ितरत
से अदीब हो...
जन्नत का तलबगार नहीं
मैं
इक अदद
ज़िंदगी, बस नसीब
हो
थोड़ी सी मुहब्बत,
कुछ सुकून
इक हमदर्द,
जो दिल के करीब
हो...
Wednesday, 5 April 2017
Monday, 20 March 2017
Thursday, 16 March 2017
Thursday, 2 March 2017
है छात्र तेरी यही कहानी...
हाथों में किताब,
आँखों में पानी
पढ़ने में बीत
जाएगा बचपन तेरा
पढ़ने में ढल
जाएगी, तेरी जवानी
बुरा हाल
तेरा आज है
सिर पर
तेरे काँटों का
ताज है
जो दुर्गति
तेरी कल होगी
वो आज
तू सुन ले
मेरी ज़ुबानी
जब परीक्षा
के दिन आएँगे
विपदा के काले
बादल छाएंगे
तब तू
ये जान ही लेगा
कि पढ़ाई तेरी
है दुश्मन जानी
खेलना कूदना सब
बंद होगा
चिंता से वज़न
भी कुछ कम
होगा
घर जेलखाने
में तबदील होगा
एक दुखद मोड़ लेगी
तेरी रामकहानी
परीक्षा के बाद
भी, ना गम
तेरे कम होंगे
फेल हुआ;
बे-इंतेहा सितम
होंगे
और अगर पास
हो भी गया
तो
चन्द रोज़ ही चलेगी तेरी मनमानी
मालिक ने तक़दीर ही
ऐसी बनाई है
तेरे आगे कुआँ, पीछे
खाई है
पढ़ाई तो ऐसी नागिन
है
जिसका काटा ना
माँगे पानी
है छात्र
तेरी यही कहानी
हाथों में किताब,
आँखों में पानी…
(अनुराग)
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